आदेश एकपक्षीय है,न्यायलय को प्रकरण से सम्बंधित सम्पूर्ण तथ्यों से अनभिज्ञ रखा गया है

आदेश एकपक्षीय

आदेश एकपक्षीय है,न्यायलय को प्रकरण से सम्बंधित सम्पूर्ण तथ्यों से अनभिज्ञ रखा गया है

रायपुर जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष आसिफ मेमन के खिलाफ न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने आज दिनांक 11 अक्टूबर को थाना सिविल लाइन पुलिस को 10 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है इसके पूर्व भी इसी मामले में उनके विरुद्ध एक अन्य न्यायालय से स्टे का ऑर्डर आया था।।

राजधानी के मोवा इलाके की सम्पत्ति के इस बहुचर्चित मामले में दोनो पक्षो द्वारा लगातार एक दूसरे के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही का दौर अब भी जारी है


ज्ञात हो कि 2014 के आसपास आसिफ मेमन ने मोवा के खान परिवार की धमतरी में रहने वाली बहू से एक डील उठाई थी हालांकि आसिफ मेमन का कहना है कि यह बहुत साफ-सुथरी डील थी जो कि बाद में राजस्व न्यायालय पहुंचकर विवादों में उलझ गई जहां तत्कालीन सरकार के ताकतवर नेता व पुलिस के बड़े अधिकारियों की भी इस पुरे मामले में सीधी दखल देखी गई थी। आसिफ मेमन का कहना है कि विवाद सामने आने के बाद मुझे इस डील से हट जाना चाहिए था लेकिन उस महिला के खिलाफ तहसील में फौती नामांतरण की कार्यवाही को बाधित करने जितने भी आरोप लगाए गए थे वे सभी जाली थे इसलिए इन विवादों के सामने आने के बाद भी मैं उस महिला के पक्ष में मजबूती से खड़ा रहा ।।

लगभग 3 साल बाद 2017 के आसपास आसिफ मेमन ने सभी दबावों को झेलते हुए इस चर्चित डील को हासिल कर लिया और फिर 2019 की शुरुआत के साथ विश्वास बनाम गद्दारी के खेल के चलते यह जमीनें एक नए विवाद में फंस गई व तब से इस मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाहियां समय समय पर अखबारों न्यूज पोर्टलों की सुर्खियों में होती हैं।

आसिफ मेमन से न्यायलय के ताजा आदेश से जुड़े इस पूरे मामले में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया।पढ़िए उनका पक्ष

आसिफ़ मेमन ने कहा की जब हम किसी पर ज्यादा भरोसा कर लेते हैं तब लिखा पढ़ी की जगह विश्वास को आधार मानकर व्यवहार करते हैं और तब हम यह भूल जाते हैं की जरूरी नही की सामने वाला भी हमारे जैसी सोच रखता होगा।

आसिफ मेमन ने कहा कि रुपया पैसा कुछ लोगों के लिए जीने का साधन मात्र होता है और कुछ लोगों के लिए यही सब कुछ होता है।


आसिफ मेमन ने कहा कि मेरे पास कुछ जरूरी दस्तावेज है जो यह साबित करते हैं कि जिन जमीनों को लेकर नूर बेगम मेरे व मेरे भाई के विरुद्ध चेक बाउंस का मामला ला रही है तमाम कानूनी कार्रवाई कर रही है उपरोक्त सभी जमीनें  मेरे द्वारा नूर बेगम के पास उनके परिवारिक बंटवारे के दौरान बहुत ही विश्वास के साथ अमानत में रखवाई गई थी।

कोई इन चीजों को देखना समझना चाहे तो 2 मिनट में पूरे मामले को समझ जाएगा कि नूर बेगम को अपने खानदान में 3 भाई 6 बहनों के बीच हुए कुल बंटवारे में उनके अपने हिस्से के तहत जहां कुल लगभग 2 एकड़ जमीन मिलनी थी वही उसे 7 एकड़ 15 डिसमिल जमीन अतिरिक्त प्राप्त हुई है।


यही वह 7 एकड़ 15 डिसमिल जमीन है जो मेरे द्वारा उनके पास भरोसे में रखवाई गई थी एवं बाद भविष्य में नूर बेगम को उपरोक्त जमीनो को मेरे नाम पर करना था 

आसिफ ने कहा कि मुझसे जुड़े करीबी लोग यह जानते है की मैं अपना काम देखने वाले एक युवक व नूर बेगम पर अत्यधिक विश्वास किया करता था।
 नूर बेगम के पास जमीनो को अमानत में रखवाने का निर्णय मेरा अपना निर्णय था मैंने ही उनसे आग्रह किया था कि उपरोक्त भूमि को बंटवारे के दौरान आप अपने पास रख लें बाद में मैं आपसे उचित समय पर इन्हें ले लूंगा।

ऐसा निर्णय करते हुए कभी कल्पना तक नहीं किया था वह मेरे साथ भविष्य में ऐसा बर्ताव करेगी और ना ही मैंने अमानत रखते समय जमीन की कीमत आंका और ना ही मेरे मन मे किसी प्रकार का कोई संशय था बल्कि आज भी अपने तत्कालीन निर्णय को लेकर मेरे मन मे कोई अफसोस नही है।

बहरहाल आज कभी मेरे विरुद्ध कोर्ट से स्टे का ऑर्डर आता है तो कभी मेरे और मेरे भाई के विरुद्ध जुर्म पंजीबद्ध करने का निर्देश जारी होता है,मेरे विरुद्ध इन सभी आदेशो का एकमात्र कारण मेरी एक चूक है कि मैं लोगों पर अत्यधिक विश्वास करता हूँ इतना कि सम्बन्धो में रुपयों पैसो को कभी तरजीह नहीं देता।

लेनदेन के मामले पक्की लिखा पढ़ी से चलते है व्यापार के इस मूलमंत्र को दरकिनार कर विश्वास को आधार बनाकर लिए गए मेरे अपने निर्णय के विरुद्ध आ रहे अदालती निर्णयों से मैं विचलित नही हूँ।यह सब बहुत स्वाभाविक है चूंकि इसका रास्ता भी कभी लिखा पढ़ी के बजाय विश्वास को आधार बनाकर स्वयं मैंने ही तय किया था।


आसिफ मेमन ने बताया कि व्यवहारिक पक्ष से हटकर अब कानूनी पक्ष की बात करें तो मोवा क्षेत्र की एक जमीन है उस पर मेरे द्वारा की गई शिकायत की जांच उपरांत नूर बेगम व दादून शाह नामक जमीन दलाल पर पुलिस ने वर्ष 2019 में 420,384,34 का प्रकरण दर्ज किया था।

मेरी इस शिकायत में प्रतिफल की राशि का भुगतान नही करने,चेक बाउंस की वजह इत्यादि का बारीकी से उल्लेख है प्रकरण अभी न्यायलय में चल रहा है।


इसी जमीन पर पलटवार करते हुए नूर बेगम  मेरे व मेरे भाई के विरुद्ध सिविल न्यायलय जाती है अपना पक्ष रखती है, उपरोक्त प्रकरण भी न्यायलय में विचाराधीन है।

कुलयोग में मैं और नूर बेगम दोनो ही उक्त जमीन के मामले में अदालत में है लेकिन फिर इसी मामले में नूर बेगम अब क्रिमिनल केस खड़े करने जरूरी तथ्यों को छुपाते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में अपील करती है,जैसा कि वकीलों से जानकारी मिली कि 6 अक्टुबर को केस पंजीबद्ध होता है और 11 अक्टूबर को अदालत मेरा पक्ष जाने बगैर मुझे सम्मन जारी किए बगैर नूर बेगम के पक्ष में एक पक्षीय फैसला सुनाते हुए मेरे व मेरे भाई के विरुद्ध 420 के तहत प्रकरण दर्ज करने पुलिस को जरूरी निर्देशित जारी करती है।


आसिफ मेमन ने कहा कि शीघ्र ही उक्त एकपक्षीय आदेश के विरुद्ध ऊपरी अदालत में हम अपना पक्ष रखेंगे।मुझे पूरा विश्वास है कि इस एकपक्षीय आदेश के विरुद्ध ऊपरी अदालत में हमारे साथ न्याय होगा।

लेकिन इस बीच आपके पोर्टल के माध्यम से मैं अपने मित्रों,परिचितों,सामाजिक बंधुओ एवं आत्मीयजनों से निवेदन करूँगा की अखबार मीडिया कि ख़बर पढ़कर हमारे विरुद्ध कोई राय ना बनाएं।

इस मामले में मेरा यह मानना है कि किसी पर विश्वास कर धोखा खाना अपना नुकसान करना मेरे नजर में अच्छी बात है बनिस्बत इसके की किसी को धोखा दूं, किसी के साथ विश्वासघात करूँ या रुपयों पैसो के लिए किसी की अमानत में खयानत करूँ।

आज नही कल नूर बेगम और उसके चालबाज साथी कानून के फंदे में होंगे और सारी चीजें लोगो के बीच स्पष्ट हो जाएंगी लेकिन इन सब के लिए एक पूरी कानूनी प्रक्रिया के रास्ते से गुजरना होगा। एक ओर व्यवहारिक पक्ष है जो बेहद मजबूत है तो दूसरी तरफ कानूनी पक्ष है, हालांकि कुछ जरूरी दस्तावेज भी है जिन्हें उचित समय में न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा, इस पूरी प्रक्रिया में सहज है कि थोड़ा वक्त लगेगा। मैं या मेरा भाई हम किसी से जमीन खरीदें और उसको प्रतिफल की राशि का भुगतान ना करें बल्कि उस पर राजनैतिक, प्रशासनिक या अन्य तरीकों से दबाव बनाये ऐसा हमारा व्यवहार नही। नूर बेगम के साथ हमारा जो सम्पत्ति विवाद है उसकी जड़ मे अमानत में खयानत है, 

सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नही

आज नहीं कल चीजें सबके सामने जरूर आएंगी।

2 मिनट में पूरे मामले को समझ जाएगा कि नूर बेगम को अपने खानदान में भाई बहनों के बीच हुए कुल बंटवारे में उनके अपने हिस्से के तहत जहां कुल लगभग 2 एकड़ जमीन मिलनी थी वही उसे 7 एकड़ 15 डिसमिल जमीन अतिरिक्त प्राप्त हुई है।


यही वह 7 एकड़ 15 डिसमिल जमीन है जो मेरे द्वारा उनके पास भरोसे में रखवाई गई थी एवं बाद भविष्य में नूर बेगम को उपरोक्त जमीनो को मेरे नाम पर करना था 

आसिफ ने कहा कि मुझसे जुड़े करीबी लोग यह जानते है की मैं अपना काम देखने वाले एक युवक व नूर बेगम पर अत्यधिक विश्वास किया करता था।
 नूर बेगम के पास जमीनो को अमानत में रखवाने का निर्णय मेरा अपना निर्णय था मैंने ही उनसे आग्रह किया था कि उपरोक्त भूमि को बंटवारे के दौरान आप अपने पास रख लें बाद में मैं आपसे उचित समय पर इन्हें ले लूंगा।

ऐसा निर्णय करते हुए कभी कल्पना तक नहीं किया था वह मेरे साथ भविष्य में ऐसा बर्ताव करेगी और ना ही मैंने अमानत रखते समय जमीन की कीमत आंका और ना ही मेरे मन मे किसी प्रकार का कोई संशय था बल्कि आज भी अपने तत्कालीन निर्णय को लेकर मेरे मन मे कोई अफसोस नही है।

बहरहाल आज कभी मेरे विरुद्ध कोर्ट से स्टे का ऑर्डर आता है तो कभी मेरे और मेरे भाई के विरुद्ध जुर्म पंजीबद्ध करने का निर्देश जारी होता है,मेरे विरुद्ध इन सभी आदेशो का एकमात्र कारण मेरी एक चूक है कि मैं लोगों पर अत्यधिक विश्वास करता हूँ इतना कि सम्बन्धो में रुपयों पैसो को कभी तरजीह नहीं देता।

लेनदेन के मामले पक्की लिखा पढ़ी से चलते है व्यापार के इस मूलमंत्र को दरकिनार कर विश्वास को आधार बनाकर लिए गए मेरे अपने निर्णय के विरुद्ध आ रहे अदालती निर्णयों से मैं विचलित नही हूँ।यह सब बहुत स्वाभाविक है चूंकि इसका रास्ता भी कभी लिखा पढ़ी के बजाय विश्वास को आधार बनाकर स्वयं मैंने ही तय किया था।


आसिफ मेमन ने बताया कि व्यवहारिक पक्ष से हटकर अब कानूनी पक्ष की बात करें तो मोवा क्षेत्र की एक जमीन है उस पर मेरे द्वारा की गई शिकायत की जांच उपरांत नूर बेगम व दादून शाह नामक जमीन दलाल पर पुलिस ने वर्ष 2019 में 420,384,34 का प्रकरण दर्ज किया था।

मेरी इस शिकायत में प्रतिफल की राशि का भुगतान नही करने,चेक बाउंस की वजह इत्यादि का बारीकी से उल्लेख है प्रकरण अभी न्यायलय में चल रहा है।


इसी जमीन पर पलटवार करते हुए नूर बेगम  मेरे व मेरे भाई के विरुद्ध सिविल न्यायलय जाती है अपना पक्ष रखती है, उपरोक्त प्रकरण भी न्यायलय में विचाराधीन है।

कुलयोग में मैं और नूर बेगम दोनो ही उक्त जमीन के मामले में अदालत में है लेकिन फिर इसी मामले में नूर बेगम अब क्रिमिनल केस खड़े करने जरूरी तथ्यों को छुपाते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में अपील करती है,जैसा कि वकीलों से जानकारी मिली कि 6 अक्टुबर को केस पंजीबद्ध होता है और 11 अक्टूबर को अदालत मेरा पक्ष जाने बगैर मुझे सम्मन जारी किए बगैर नूर बेगम के पक्ष में एक पक्षीय फैसला सुनाते हुए मेरे व मेरे भाई के विरुद्ध 420 के तहत प्रकरण दर