आसिफ मेमन पर एफआईआर, लेकिन मीडिया ने उनका पक्ष जानने की जरूरत नही समझी,पढ़िए...

कांग्रेस नेता आसिफ़ मेमन व उनके भाई के खिलाफ कथित धोखाधड़ी पर कोर्ट के आदेश से एफआईआर हुई है लेकिन किसी ने भी उनका पक्ष जानने की कोशिश भी नही की।

आसिफ मेमन पर एफआईआर, लेकिन मीडिया ने उनका पक्ष जानने की जरूरत नही समझी,पढ़िए...

डियर सिस्टर नूर बेगम

ये अपना शहर है हमारे लिए आज भी बहुत छोटा है इस पूरे शहर में जो अपने लोग है वे जानते है कि हम गलत नही कर सकते, बाकी अदालत को मूल तथ्यों से अनभिज्ञ रख कर आपने जो आदेश पाया है; इससे सम्बंधित खबर पढ़कर जो भ्रमित हो रहे कल चीजें जब ठीक हो जाएंगी तब इन्ही समाचार माध्यमो से उन तक सच्चाई पहुच जाएगी.आज आपसे बात करनी है।आप तक मेरी बात पहुंच जाए, यह ज्यादा जरूरी है।

बहन आपको याद होगा
2017 में आपके पारिवार में बंटवारा हुआ था।

इस पूरे बंटवारे में आपको लगभग 2 एकड़ जमीन मिलनी थी,आपकी सभी बहनों को इतनी ही जमीन मिली परन्तु आपको 7 एकड़ 15 डिसमिल भूमि अतिरिक्त मिली। कानूनी नजरिये से ये भूमि आपके मृतक भाई की ओर से उनकी पत्नी बुशरा शरीफ ने आपके हक में दिया था।

जबकि व्यवहारिक तथा कानूनी पक्ष भी यह है कि यह 7 एकड़ भूमि जिसका सौदा मैंने आपकी भाभी बुशरा शरीफ से किया था ।मेरे कहने पर ही इन जमीनो को बुशरा शरीफ ने आपके नाम किया था। मैंने आप पर भरोसा किया, यह सोचकर कि आप के पास यह अमानत सुरक्षित रहेगी।
लेकिन 2019 लगते साथ आपने उस भरोसे को तोड़ दिया, मेरे खिलाफ शिकायतें करने लगीं और आज उन जमीनों को कोर्ट कचहरी में खड़ा कर आप मुझसे पैसा मांग रही हैं ..उन जमीनों का जो व्यवहारिक रूप से आपकी नही हैं, उन जमीनों का जो आपके पास मेरी अमानत रखी गई थी।अमानती जमीनों को लौटाने भला कौन पैसा मांगता है और इस तरह तो कतई नही मांगता।


तमाम वकील और जमीनों का काम करने वाले लोग और मेरे करीबी साथी,परिचित,परिवारजन जो इस पूरे प्रकरण को जानते हैं, वे भलीभांति जानते है कि आपने मेरे साथ धोखाधड़ी की है।अब आप आज कानूनी पेंच में फंसाकर एक अलग तस्वीर खड़ी करना चाह रही है।

आपके ही लोग आप को उकसाते हुए चिट्ठी पत्री में बुजुर्ग व बेचारी बताते हैं,लेकिन मैं विनम्रता पूर्वक आपको बताना चाहूंगा कि आप ना तो बुजुर्ग हैं ना ही बेचारी हैं।

सबको नही पता कि आप राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के बिल्कुल पड़ोस में रहती हैं।हर किसी को उनका डर बताती हैं। कोई भी शिकायत आप थाने में या जिलें में नही करती बल्कि सीधे ऊपर करती हैं,जबकि वास्तविकता यह है कि आपको वहां से कोई मदद नही मिलती,आप बस पड़ोसी का फायदा उठा कर लोगो को भ्रमित करती हैं/डराती हैं।

मेरी तरह लोगो को यह भी नही मालूम था कि आप कोर्ट कचहरी में अभ्यस्त हैं मेरे अलावा और भी लोगों के खिलाफ आपने मुकदमें दायर कर रखे हैं।

दरअसल आप जिनका मोहरा बन चुकी हैं,वो अपनी लालच में आपको मुझसे उलझाकर ना सिर्फ आपके पास मेरी रखी अमानती जमीनों को कौड़ियों के मोल आपसे हड़प लेंगे बल्कि वे आपकी अपनी बेशकीमती जमीनें भी झटक लेना चाहते हैं।

पर मेरी दिक्कत यह नही है आप की झूठी कार्रवाई, आपकी झूठी शिकायतें और कुछ खास अखबारों में मेरी छवि को लेकर छपवाए जाने वाली खबरों से मैं विचलित जरूर हूँ लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि मैं अपने कदम पीछे कर लूंगा।

कोई भी अपना हक नहीं छोड़ता,बहुत जल्दी जब मैं कानूनी रास्ते से अपने हक की जमीनें हासिल करने में सफल हो जाऊंगा उस दौरान तक यदि आप मेरी अमानती जमीनें ठिकाने लगा चुकी होंगी तब भी नुकसान में आप ही रहेंगी ,क्योंकि मुझे केवल अपनी शेष 4 एकड़ जमीनों से मतलब है;उस 4 एकड़ की पूर्ति आपको यदि अपनी जमीन भाटाबाड़ी से देकर पूरी करना पड़े तो यह आपके लिए बहुत तकलीफदेह होगी।मेरी अमानती जमीनों सहित आपकी अन्य जमीनों के मुकाबले भाटाबाड़ी नाम से पहचाने जाने वाली जमीनों की कीमत कितनी है यह आप भी जानती होंगी।

इसलिए बहन आपसे रिक्वेस्ट है कि मेरी अमानती जमीनों में जो 4 एकड़ अब भी आपके पास है आपके ही नाम है उन्हें किसी के बहकावे में आकर मत बिगाड़ियेगा,बाकी जिन जमीनो को आपने कोर्ट में घसीटा है और इन दिनों अखबारों में अपने सम्पर्को के माध्यम से मेरे विरुद्ध आप जो खबरें प्लांट करवा रही हैं,यह तय है कि आपका यह वार आपको आगे चलकर उल्टा भी पड़ सकता है।

बहन मेरी आखिरी बात

कहावत है कि जो मेरा नही हुआ वो किसी का नही हो सकता;
आपका भी नही, उन कुछ बड़े अफसरों का भी नही, जो इसके परिप्रेक्ष्य में अर्धसत्य को जानते हुए अपनी बड़ी रकम निवेश कर रहे हैं @रवि चोरहा